सर्द सुबह की तन्हाई में
तेरे ख्यालों की रज़ाई में
लिपटे रहें कुछ देर और
वक़्त के कोहरे में छेद कर
यादों के धुंद को कुरेद कर
तकते रहें कुछ देर और
कमज़ोर से सूरज की अकड़ पर
उम्मीद की किरण को जकड़ कर
लटके रहे कुछ देर और
आंसू को ओस का नाम देकर
लव्ज़ों के फेर को अंजाम देकर
लिखते रहें कुछ शेर और
तेरे ख्यालों की रज़ाई में
लिपटे रहें कुछ देर और
वक़्त के कोहरे में छेद कर
यादों के धुंद को कुरेद कर
तकते रहें कुछ देर और
कमज़ोर से सूरज की अकड़ पर
उम्मीद की किरण को जकड़ कर
लटके रहे कुछ देर और
आंसू को ओस का नाम देकर
लव्ज़ों के फेर को अंजाम देकर
लिखते रहें कुछ शेर और