जज़्बातों में इतनी
किफायत न करो
हया की तुम इतनी
वकालत न करो
दबा रक्खा बरसों
जो दिल में अरमान
उस अरमान की इतनी
ज़लालत न करो
इशारों में तुमने
सराहा है मुझे
इशारों में इतनी
नज़ाकत न करो
बहुत हिम्मत करके
थामा है तेरा हाथ
इस हिम्मत की इतनी
शिकायत न करो
देखी है खुदाई
जलवों में तेरे
तेरी ज़िद्द है इतनी
इबादत न करो
अदा तेरी ऐसी
के मन मचल जाये
फरमान तेरा इतनी
शरारत न करो
गैरों से मिलती हो
तो आग लगे दिल में
गुज़ारिश है इतनी
हरारत न करो
ज़िन्दगी गुज़ारी
आशिकी में तेरी
तू कहती है इतनी
मुहब्बत न करो