Saturday, March 22, 2025

छिड़ी हुई है जंग chidi hui hai jang

छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में

बारूद और चीखें घुलें एक आवाज़ में  

पिस रहे हैं लोग याहवेह खुदा के बीच 

और दुआ मांगते हैं  शुमाह और नमाज़ में 

छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में


हैं सब सियासतें तमाशाई इस कदर

के हल ढूंढ़ती हैं महज़ अलफ़ाज़ में 

छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में 


हार जीत  सरहदें हैं मसला-ऐ-ज़िन्दगी 

और जान चल रही है मौत के मिज़ाज में    

छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में 


शतरंज नहीं है ये इस बिसात में है खून

ऐतबार करें तो प्यादे किस चाल बाज़ में 

छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में 


मंडरा रहे हैं गिद्द मुर्दों को नोचते हैं

एक और जंग छिड़ेगी चील और बाज़ में 

छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में   


अब गले से लगा लो एक दुसरे का दीन

और कुछ नहीं रक्खा है इस अमन के राज़ में

छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में  

Tuesday, March 4, 2025

प्रथम वंदना pratham vandana

मोह छल कपट रहित

निःस्वार्थता सहित

सभ्य शांत और कुलीन 

सत वचन में विलीन 

प्रेम की भण्डारिणी 

मोहिनी मन मोहिनी 


शुद्धता की प्रतीक

हर कथन में एक सीख

नम्रता व्यवहार में 

दृढ़ता विचार  में

कोमल ह्रदय की स्वामिनी

मोहिनी मन मोहिनी


चट्टान आपदाओं में 

सादगी दुआओं में 

ब्रह्माण्ड उसकी गोद में

निर्वाण उसके शोध में 

मेरी मार्गदर्शिनी

मोहिनी मन मोहिनी


मुझे दिया है ज्ञान पर

अंकुश अभिमान पर

गर्व मेरी शान पर

जान मेरी जान पर

माँ नहीं पारसमणि

मोहिनी मन मोहिनी 

Sunday, March 2, 2025

तुम्हें पता क्या tumhein pata kya

तुम्हें पता क्या तुम्हारा आँचल

हवा को क्या क्या बता रहा है

तुम्हारे दामन से यूं लिपटके

वो राज़-ऐ-उल्फत जता रहा है

ये जो खज़ाना मासूमियत का

मुआशरों में नुमाइशी है 

उसी के पीछे छुपी शरारत 

ज़माने भर को दिखा रहा है


ये चिलमनों की तहें हटाकर   

कह जाती हो तुम जो एक नज़र में

उसी नज़र को जो हम पढ़ें तो

लगे है पूरा खत आ रहा है


इश्क़ और जंग में सही गलत क्या

रिवायतों से हम हैं मुखातिब 

सही सही की राह चले पर  

ख्याल मन में गलत आ रहा है


तुम्हारे गालों पे लट तुम्हारी 

ये हरकतें कर रहीं है कैसी 

सम्भालो ज़ुल्फ़ें इरादा इनका

सुलझे हुओं को उलझा रहा है 


हमारे शेरों में वो ज़राफ़त 

को सुनके तुमने इशारा समझा  

फिर जो तबस्सुम छुपाई तुमने

हमारा दिल मुस्कुरा रहा है 


गली से गुज़री झुकाये नज़रें  

सड़क पे शायद रही तवज्जु

पलट के देखा हमें तो समझे 

हमारा जादू भी छा रहा है