तुझे दूर से निहारूं
बस हद मेरी यही है
के दिल ही दिल में चाहूँ
किस्मत मेरी यही है
ये महफिलों के अपनी
क़ानून भी हैं ऐसे
कुर्बत में फासले हैं
कुर्बत मेरी यही है
मसरूफ हो चला हूँ
ख़्वाबों के बादलों में
मसरूफियत को छोड़ो
फुर्सत मेरी यही है
तेरे कई इशारों
के तर्जुमे किये हैं
ये तर्जुमे सही हों
हसरत मेरी यही है
रिश्तों की हथकड़ी है
पैरों में बेड़ियाँ हैं
ख्यालों में मेरी झूमो
राहत मेरी यही है
ये दायरे हैं जिनको
हैं फाँदना तो मुमकिन
माने ज़मीर कैसे
दिक्कत मेरी यही है
मेरे अपने पूछते हैं
मैं उनके पास हूँ क्या?
मैं झूठ बोलता हूँ
लानत मेरी यही है
तेरा वजूद खोजूं
अपनों की शख्सियत में
फिर उनको ये जताऊं
चाहत मेरी यही है