Saturday, April 8, 2023

हद यही है मेरी ye hadd hai meri

तुझे दूर से निहारूं

बस हद मेरी यही है 

के दिल ही दिल में चाहूँ

किस्मत मेरी यही है

ये महफिलों के अपनी

क़ानून भी हैं ऐसे 

कुर्बत में फासले हैं

कुर्बत मेरी यही है


मसरूफ हो चला हूँ

ख़्वाबों के बादलों में

मसरूफियत को छोड़ो

फुर्सत मेरी यही है


तेरे कई इशारों

के तर्जुमे किये हैं

ये तर्जुमे सही हों 

हसरत मेरी यही है


रिश्तों की हथकड़ी है

पैरों में बेड़ियाँ हैं

ख्यालों में मेरी झूमो

राहत मेरी यही है


ये दायरे हैं जिनको

हैं फाँदना तो मुमकिन

माने ज़मीर कैसे 

दिक्कत मेरी यही है


मेरे अपने पूछते हैं

मैं उनके पास हूँ क्या?

मैं झूठ बोलता हूँ

लानत मेरी यही है


तेरा वजूद खोजूं

अपनों की शख्सियत में

फिर उनको ये जताऊं

चाहत मेरी यही है