Tuesday, April 28, 2026

किस्मत के मारे kismat ke maare

आँखों के तेरी 

इशारे हैं क्या?

मुस्कानों के ये 

लशकारें हैं क्या?

दूर से घायल  

कर देगी हमको 

किस्मत के हम इतने 

मारे हैं क्या?!

गैरों संग लुत्फ़-

अन्दोज़ी इतनी!

हम बस सुख दुःख के

सहारे हैं क्या!

हुआ बहुत अब 

बसा ले तू दिल में 

कब तक भटकेंगे

बंजारे हैं क्या?

तोड़ी ज़ंजीरें  

ज़माने की सब

ये बीच हमारे 

दीवारें हैं क्या!

मैं इर्द-गिर्द तेरे

बुनूँ जितने खाब

आसमान में उतने

सितारे हैं क्या?  

आग के दरिया से

डूब के गुज़रे तो 

जलती दुनिया के  

अंगारे हैं क्या! 

दर पे है तेरे

आशिक़ों की भीड़ 

मेरे मुखातिब  

बेचारे हैं क्या!? 

बहुत रंगीले

हैं मेरे सपने

मेरे ये सपने

हमारे हैं क्या?