Monday, March 13, 2017

होली मुबारक समृद्धि



भोली है निकली है घर से
होली है दुबकी नहीं डर से
दरिंदा है छेड़ेगा खामखां में
परिंदा है वो दिल आसमाँ में
डरेगी नहीं वो गलत ताकतों से
मरेगी नहीं उसकी चाह आफतों से
ख़ौफ़ज़दा हूँ खतरों का ज़िक्र तो करूंगा
एक पिता हूँ हर लम्हा फ़िक्र तो करूंगा
टोकूंगा नहीं सबक़ है इस किस्से में
रोकूंगा नहीं रंग सभी हैँ तेरे हिस्से में

Wednesday, March 8, 2017

एक दिन की खैरात: Women's Day

बराबरी की जंग तू लड़ना मत
इस मायाजाल में तू पड़ना मत
तेरा वजूद आज़ाद है
कुछ भी कर गुजरने को
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत

तेरा दिन किसी का ग़ुलाम नहीं
तेरी ख्वाहिशें बिलकुल आम नहीं
तय कर तू क्या होगी पहचान तेरी
खुद ज़नाना अंदाज़ों को जकड़ना मत
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत

एक दिन की खैरात मत करना क़ुबूल
तेरी बुलंदी का रहे  बस एक उसूल
हर दिन है तेरा, हर रात भी तेरी
इस हक़ के आग़ाज़ से बिछड़ना मत
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत