Tuesday, June 9, 2020

ग़ज़ब


रातों के अंधेरों का 
कुछ तो सबब ज़रूर होगा

ग़मगीन इस माहौल में
कहीं रब ज़रूर होगा

तू नहीं तुझ पर शायरी 
में मसरूफ हो रहे हैं

इस तंहाई के सेहर में
कुछ ग़ज़ब ज़रूर होगा