जो शिद्दत से किया था इश्क़
दोबारा हो नहीं सकता
के इसके एवज़ दौलत का
तिजारा हो नहीं सकता
खंजर पीठ पर जिनने
भोंका है वो हाथों में
मेरा तो दिल ये कहता है
तुम्हारा हो नहीं सकता
तेरी चाहत को परखे बिन
गुज़ारा जिस ने भी जीवन
उससे ज़्यादा तो किस्मत
का मारा हो नहीं सकता
तू जो आये महफ़िल में
तुझे कोई और न देखे
जो देखे तो मुझे वो शक़्स
गवारा हो नहीं सकता
मीठा लहजा है उसका
जुबां भी उसकी मीठी है
ऐ दरियादिल तेरा पानी
तो खारा हो नहीं सकता
तू मेरे रु-बा-रु भी हो
तेरी आँखों में झाँकू मैं
ख़ुशनुम्मा इससे ज़्यादा
नज़ारा हो नहीं सकता