Thursday, April 22, 2021

साँसों की हरकत


साँसों की हरकत 

पे शक है मुझे

यारों की कुर्बत

पे शक है मुझे

है कैसी मजबूरी 

ये दो गज़ की दूरी

अब उसकी रेहमत  

पे शक है मुझे


दिखता ही नहीं 

दायरा-ए-फलक 

छुपा है कहीं

वो रंगीं धुनक

कुदरत-ए-उसूल हो

हस्ब-ए-मामूल हो 

इस उम्मीद की जुरर्हत 

पे शक है मुझे

साँसों की हरकत 

पे शक है मुझे


कहर के चलते 

सब उधड़ रहा 

अनदेखे हरीफ़ से  

इंसां लड़ रहा

ये कौन सा ज़हर है 

जला रहा शहर है 

कायनात की वहशत

पे शक है मुझे

साँसों की हरकत 

पे शक है मुझे


बर्दाश्त नहीं है 

बेबस मजबूरी

मज़लूम न देगा 

इस को मंज़ूरी

अब इस लाचारी 

से जंग है हमारी  

और... 

लाचारी की ताकत

पे शक है मुझे

साँसों की हरकत 

पे शक है मुझे


Monday, April 12, 2021

वक़्त

वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है 

तारीख से इस ने हर शख्स मिटाया है 


इमारतों को खँडहर करार इसने किया है 

और यह गुनाह बार बार इसने किया है 

कहते हैं की वक़्त हर ज़ख्म भर देता है 

इस वहम को भी तार तार इसने किया है 

तेरी जुदाई ने हमें बरसों सताया है 

वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है?


ज़माने में इज़ाफ़ा ये वक़्त क्या करेगा?

जवानी का लिफाफा ये वक़्त क्या भरेगा?

लड़कपन गवा दिया इश्क़ के जूए में 

उस दाव पे मुनाफा ये वक़्त क्या करेगा?

सिलसिला उम्मीदों का इसने चलाया है? 

वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है


वक़्त सिर्फ इस लम्हे का मेहमान है

सपनों की बेसब्री से अनजान है?

एक तू है जिसे वक़्त ने फुर्सत से बनाया  

बता वक़्त तुझपे क्यों मेहरबान है?

हर बरस तेरे नूर में निखार आया है!

वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है?


Tuesday, April 6, 2021

मुलाक़ात

 देर सवेर मुलाक़ात तो होगी

तकल्लुफ से ही पर बात तो होगी

सबर भी है, उम्मीद भी है

फिर से सही, शुरुआत तो होगी

इश्क़ का ज़ोर जब असर कर दे

दुनिया इधर से उधर कर दे 

आज़मा के देखूं इश्क़ का ज़ोर 

कभी ये करामात तो होगी

तेरी बेरुखी खंजर सी है

ये रूह तेरे बिन बंजर सी है 

दीदार-ए-यार के प्यासे हैं हम

बेमौसम ही, बरसात तो होगी

ख्वाब और हकीकत के दरमियाँ

फासले तये करती कहानियां 

गुज़रती है सिर्फ ख़्वाबों में जो 

हकीकत में ववारदात तो होगी

चलो कल से

चलो कल से  तुम्हारे बिन गुज़ारा कर ही लेते हैं

वो रातों को जो अपनी थीं  पराया कर ही लेते हैं

वो गलियों में  न टहलेंगे जहाँ बदनाम  हम खुश थे

चलो कल से मोहल्ले से  किनारा कर ही लेते हैं


वफ़ा करनी थी तुमसे पर बे-वफा  जो तुम निकले

चलो कल से जफ़ाओं का नज़ारा कर ही लेते हैं


ये दिल तो सिर्फ  धड़कता है तुम्हारी ही अदाओं पर

चलो कल से ये दिल को हम  आवारा कर ही लेते हैं


वो तो शख्स  पराया था जिसे अपना लिया तुमने

चलो कल से उसे भी हम हमारा कर  ही लेते हैं


हमें तो उम्र भर तुम्ही  को चाहने की  तमन्ना थी

चलो कल से किसी से इश्क़ दोबारा कर ही लेते हैं