आज चकाचौंद है ये रात तेरी
हर महफ़िल में होती है बात तेरी
कहीं जश्न तो कहीं ज़र्रानवाज़ी भी है
कहीं तारीफों की आतिशबाज़ी भी है
जो सन्नाटा था कल तक वो आज नहीं
पर तू इस शोहरत की मोहताज नहीं
तेरा जज़्बा तो बरकत करता रहेगा
तेरा हुनर तो हरकत करता रहेगा
हर महफ़िल में होती है बात तेरी
कहीं जश्न तो कहीं ज़र्रानवाज़ी भी है
कहीं तारीफों की आतिशबाज़ी भी है
जो सन्नाटा था कल तक वो आज नहीं
पर तू इस शोहरत की मोहताज नहीं
तेरा जज़्बा तो बरकत करता रहेगा
तेरा हुनर तो हरकत करता रहेगा