Tuesday, July 15, 2025

शायर की उम्मीद shayar ki ummeed

ऐलान ऐ मुहब्बत का वादा नहीं है

वो दिल जीतने पे अमादा नहीं है

मेहबूबा  पे वो जां छिड़कने है आया

कुछ पाने का उसका इरादा नहीं है


अधूरी रहेगी ये दास्ताँ ऐ उल्फत   

पर इश्क़ ये हरगिज़ भी आधा नहीं है


बेवफाई का रास्ता है टेढ़ा मेढ़ा

और वफ़ा का भी सीदा सादा नहीं है 


सियासत के ठेकेदारों का रुतबा 

दौलत और दम है, मर्यादा नहीं है 


बिसात के आखिरी घर पे जो अदना है

चालों का राजा है, वो प्यादा नहीं है


वाह वाही की गूँजें, ये तालियों का शोर

शायर की उम्मीद इससे ज़्यादा नहीं है