Tuesday, October 3, 2023

वक़्त से बातचीत waqt se baatcheet


ये पूछता है मुझसे

अब वक़्त का तक़ाज़ा 

यहां तक तू पहुंचा 

अगला मुकाम क्या है


            ऐ वक़्त तू है ज़ालिम

            है  इस तरह नवाज़ा

            ऐंठे हैं दाम अब तक

            तो अगला दाम क्या है?


काम मेरा मैं खोलूं 

फिर नया दरवाज़ा 

तू बढ़ के खोल उसको

तेरा और काम क्या है?


            उम्मीद है ये बासी

            तू पेश कर कुछ ताज़ा

            ये ज़िन्द्दगी है बाकी

            तेरा इंतज़ाम क्या है?


वो इंतज़ाम मेरा

तो है एक जनाज़ा 

तेरी जंग तय करेगी

तेरा अंजाम क्या है 


            रिश्तों की दास्तान है    

            ज़िन्दगी लिहाज़ा

            रिश्तों में ढूंढ़ता हूँ 

            मेरा अहतराम क्या है 


Monday, September 18, 2023

जस्बातों में किफायत jazbaaton mein kifaayat

 

जज़्बातों में इतनी

किफायत न करो

हया की तुम इतनी 

वकालत न करो

दबा रक्खा बरसों 

जो दिल में अरमान

उस अरमान की इतनी

ज़लालत न करो


इशारों में तुमने

सराहा है मुझे

इशारों में इतनी

नज़ाकत न करो


बहुत हिम्मत करके

थामा है तेरा हाथ 

इस हिम्मत की इतनी

शिकायत न करो 


देखी है खुदाई

जलवों में तेरे 

तेरी ज़िद्द है इतनी

इबादत न करो


अदा तेरी ऐसी

के मन मचल जाये

फरमान तेरा इतनी 

शरारत न करो


गैरों से मिलती हो

तो आग लगे दिल में

गुज़ारिश है इतनी

हरारत न करो


ज़िन्दगी गुज़ारी

आशिकी में तेरी 

तू कहती है इतनी

मुहब्बत न करो


Saturday, July 29, 2023

बारिश baarish

टप टप करके 

गपशप करके 

इन बूँदें ने बारिश की 

खिलखिलाकर

छपछपाकर

नटखटियों से साज़िश की 

गढ़ गढ़ करके  

बड़ बड़ करके 

गर्जन काली बदरी की

शोर मचाकर 

तैश दिखाकर 

स्वांग रचें बेकद्री की

खूब कड़क के

तेज़ भड़क के

तांडव जो है बिजली का

चकाचौंध कर

गगन फांद कर 

नर्तन है मन मचली का

चेह चाहाके

पर झटकाके 

पनाह ली परिंदों ने 

डाल डाल पे 

पात पात पे

जश्न करा बाशिंदों ने 

गदगद होकर

सुधबुध खोकर 

खिड़की से मैं झाँक रहा

भीगे दर्पण 

में मैं बचपन

के वो नज़ारे ताक रहा

बौछारों की

ललकारों की

आ गया मैं बातों में

बाहर आकर 

झिझक हटाकर

भीगा मैं बरसातों मैं

बच्चे बनकर

ऐसे धुलकर

हम यादों में खूब गए  

कुछ दूरी में

मजबूरी में

कितनों के सपने डूब गए


Saturday, April 8, 2023

हद यही है मेरी ye hadd hai meri

तुझे दूर से निहारूं

बस हद मेरी यही है 

के दिल ही दिल में चाहूँ

किस्मत मेरी यही है

ये महफिलों के अपनी

क़ानून भी हैं ऐसे 

कुर्बत में फासले हैं

कुर्बत मेरी यही है


मसरूफ हो चला हूँ

ख़्वाबों के बादलों में

मसरूफियत को छोड़ो

फुर्सत मेरी यही है


तेरे कई इशारों

के तर्जुमे किये हैं

ये तर्जुमे सही हों 

हसरत मेरी यही है


रिश्तों की हथकड़ी है

पैरों में बेड़ियाँ हैं

ख्यालों में मेरी झूमो

राहत मेरी यही है


ये दायरे हैं जिनको

हैं फाँदना तो मुमकिन

माने ज़मीर कैसे 

दिक्कत मेरी यही है


मेरे अपने पूछते हैं

मैं उनके पास हूँ क्या?

मैं झूठ बोलता हूँ

लानत मेरी यही है


तेरा वजूद खोजूं

अपनों की शख्सियत में

फिर उनको ये जताऊं

चाहत मेरी यही है


Friday, February 24, 2023

फरक

 

हालातों पे

तवज्जु है

तेरी है बाएं 

मेरी है दाएं

तेरे सच और

मेरे सच में

मतभेदों 

के हैं साये 

जिरह कर ले

मेरे संग तू

ये साये तो

रहेंगे ही 

पर इनको दिल 

पे न लेना  

उजाले गुम 

न हो जाएं 


ये रिश्तों की 

नज़ाकत है 

चटक जाते 

हैं पल भर में 

चटक जाने

की नौबत हो

तो मुद्दों को

ही दफ़नायें 


ज़हरीले

ये मतभेदों

का बस एक तोड़ 

है यारों 

ठहाकों के

है मीठे जाम

इन्हें हम घोल 

पी जाएं 


Sunday, January 15, 2023

फितरत

 तेरी ये फितरत 

भी हो सकती है

हमसे मुहब्बत 

भी हो सकती है

करिश्मे होते 

देखे हैं वरना

जायज़ तो नफरत

भी हो सकती है