ये पूछता है मुझसे
अब वक़्त का तक़ाज़ा
यहां तक तू पहुंचा
अगला मुकाम क्या है
ऐ वक़्त तू है ज़ालिम
है इस तरह नवाज़ा
ऐंठे हैं दाम अब तक
तो अगला दाम क्या है?
काम मेरा मैं खोलूं
फिर नया दरवाज़ा
तू बढ़ के खोल उसको
तेरा और काम क्या है?
उम्मीद है ये बासी
तू पेश कर कुछ ताज़ा
ये ज़िन्द्दगी है बाकी
तेरा इंतज़ाम क्या है?
वो इंतज़ाम मेरा
तो है एक जनाज़ा
तेरी जंग तय करेगी
तेरा अंजाम क्या है
रिश्तों की दास्तान है
ज़िन्दगी लिहाज़ा
रिश्तों में ढूंढ़ता हूँ
मेरा अहतराम क्या है
जज़्बातों में इतनी
किफायत न करो
हया की तुम इतनी
वकालत न करो
दबा रक्खा बरसों
जो दिल में अरमान
उस अरमान की इतनी
ज़लालत न करो
इशारों में तुमने
सराहा है मुझे
इशारों में इतनी
नज़ाकत न करो
बहुत हिम्मत करके
थामा है तेरा हाथ
इस हिम्मत की इतनी
शिकायत न करो
देखी है खुदाई
जलवों में तेरे
तेरी ज़िद्द है इतनी
इबादत न करो
अदा तेरी ऐसी
के मन मचल जाये
फरमान तेरा इतनी
शरारत न करो
गैरों से मिलती हो
तो आग लगे दिल में
गुज़ारिश है इतनी
हरारत न करो
ज़िन्दगी गुज़ारी
आशिकी में तेरी
तू कहती है इतनी
मुहब्बत न करो
टप टप करके
गपशप करके
इन बूँदें ने बारिश की
खिलखिलाकर
छपछपाकर
नटखटियों से साज़िश की
गढ़ गढ़ करके
बड़ बड़ करके
गर्जन काली बदरी की
शोर मचाकर
तैश दिखाकर
स्वांग रचें बेकद्री की
खूब कड़क के
तेज़ भड़क के
तांडव जो है बिजली का
चकाचौंध कर
गगन फांद कर
नर्तन है मन मचली का
चेह चाहाके
पर झटकाके
पनाह ली परिंदों ने
डाल डाल पे
पात पात पे
जश्न करा बाशिंदों ने
गदगद होकर
सुधबुध खोकर
खिड़की से मैं झाँक रहा
भीगे दर्पण
में मैं बचपन
के वो नज़ारे ताक रहा
बौछारों की
ललकारों की
आ गया मैं बातों में
बाहर आकर
झिझक हटाकर
भीगा मैं बरसातों मैं
बच्चे बनकर
ऐसे धुलकर
हम यादों में खूब गए
कुछ दूरी में
मजबूरी में
कितनों के सपने डूब गए
तुझे दूर से निहारूं
बस हद मेरी यही है
के दिल ही दिल में चाहूँ
किस्मत मेरी यही है
ये महफिलों के अपनी
क़ानून भी हैं ऐसे
कुर्बत में फासले हैं
कुर्बत मेरी यही है
मसरूफ हो चला हूँ
ख़्वाबों के बादलों में
मसरूफियत को छोड़ो
फुर्सत मेरी यही है
तेरे कई इशारों
के तर्जुमे किये हैं
ये तर्जुमे सही हों
हसरत मेरी यही है
रिश्तों की हथकड़ी है
पैरों में बेड़ियाँ हैं
ख्यालों में मेरी झूमो
राहत मेरी यही है
ये दायरे हैं जिनको
हैं फाँदना तो मुमकिन
माने ज़मीर कैसे
दिक्कत मेरी यही है
मेरे अपने पूछते हैं
मैं उनके पास हूँ क्या?
मैं झूठ बोलता हूँ
लानत मेरी यही है
तेरा वजूद खोजूं
अपनों की शख्सियत में
फिर उनको ये जताऊं
चाहत मेरी यही है
हालातों पे
तवज्जु है
तेरी है बाएं
मेरी है दाएं
तेरे सच और
मेरे सच में
मतभेदों
के हैं साये
जिरह कर ले
मेरे संग तू
ये साये तो
रहेंगे ही
पर इनको दिल
पे न लेना
उजाले गुम
न हो जाएं
ये रिश्तों की
नज़ाकत है
चटक जाते
हैं पल भर में
चटक जाने
की नौबत हो
तो मुद्दों को
ही दफ़नायें
ज़हरीले
ये मतभेदों
का बस एक तोड़
है यारों
ठहाकों के
है मीठे जाम
इन्हें हम घोल
पी जाएं
तेरी ये फितरत
भी हो सकती है
हमसे मुहब्बत
भी हो सकती है
करिश्मे होते
देखे हैं वरना
जायज़ तो नफरत
भी हो सकती है