Sunday, March 31, 2024

मौसम mausam

 ये मौसम को बदलने दो

पहाड़ों को पिघलने दो

उबल जाएँगी सब नदियाँ 

वो नदियों को मचलने दो


हवाओं में जो खुशबू है

उसे तुम कैद मत करना 

यही आवाज़ गुलों की है

फ़िज़ा में इसको घुलने दो

 

जो भीगे हैं ये बारिश में

बिना छातों के निकले थे 

गली में उनकी फिसलन थी 

उस फिसलन में फिसलने दो 


अब गरम दौर भी आएगा

चलेगा कायदा लूह का 

अब इज़्ज़त दो कानूनों को

लापरवाहों को जलने दो 


ये मौसम को बदलने दो

पहाड़ों को पिघलने दो

उबल जाएँगी सब नदियाँ 

वो नदियों को मचलने दो