मेरे सामने थी मंज़िल
पर मैं भटक गया था
सब कुछ था मुझको हासिल
पर मैं भटक गया था
करी इश्क़ की वकालत
जीती हुई थी बाज़ी
मेरा दिल था मुव्वक्किल
पर मैं भटक गया था
वो कारवाँ था जिसमें
हर ख्वाब था मयस्सर
थी तू भी उसमें शामिल
पर मैं भटक गया था
तूफ़ान से बचाके
मैं कश्ती लेके आया
वो सामने था साहिल
पर मैं भटक गया था
शेरों को मेरे सुनने
बेसब्र था ज़माना
पूरी सजी थी महफ़िल
पर मैं भटक गया था