shayadshayar
Saturday, January 28, 2017
नयी जवानी
ताज़ी हवा का अंदाज़ हो तुम
खूबसूरत सा एक राज़ हो तुम
वो नज़र, वो हंसी, वो अल्हड़पन
एक नयी जवानी का आघाज़ हो तुम
Wednesday, January 25, 2017
आधी गड्डी
ताश की आधी गड्डी हमने
फैंट फैंट के बाटी है
प्यार मुहब्बत शक़ और झगड़ा
सब झेल के काटी है
चिड़ी के पत्ते कभी बटे
और कभी पान की बारी थी
गुससे में भी तू मुझको
लगती बहुत ही प्यारी थी
बेगम बादशाह साथ बटे
तो कभी हिससे आया गुलाम
ईंटों से बचने के लिए
हर हुकुम को मैंने किया सलाम!
आधी गड्डी और पड़ी है
और दो जोकर भी तो हैं
माना के ज़ाया उम्र हुई पर
कुछ पाते खोकर भी तो हैं!!
नए रिश्ते निभाने नहीं आते
नए रिश्ते निभाने नहीं आते
कुछ सपने भुलाने नहीं आते
पुरानी यादों की गुल्लक तोड़ कर देखी
अब वो सिक्के चलाने नहीं आते
कई मोड़ हमने मोड़ कर देखे
टूटे दिलों को फिर जोड़ कर देखे
ढूँढ़ते रहे बहाने नयी शुरुआतों के
भूलने के बहाने नहीं आते
नए रिश्ते निभाने नहीं आते
तू खफा है तो ये तेरा हक़ है
मैं मुल्ज़िम हूँ पर ये फ़रक़ है
दुनिया छिपा लेती है जज़्बात अपने
मुझे दर्द छिपाने नहीं आते
नए रिश्ते निभाने नहीं आते
रहम कर पकड़ ले हाथ मेरे
कुछ दूर तो चल ले साथ मेरे
कुछ लिख ही दूंगा उसको देख तुझ में
गैरों पे शेर सुनाने नहीं आते
नए रिश्ते निभाने नहीं आते
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