ये रूहानी ही सही पर दुरुस्त निस्बत तो है
मेरा मुस्तकबिल नहीं तू मेरी किस्मत तो है
ये शायराना ही सही पर मेहफ़ूज़ नाता तो है
तू मेरी ग़ज़ल में नहीं पर ज़िक्र तेरा आता तो है
ये जिस्मानी ना सही बिष कीमत रिश्ता तो है
हवस नहीं इबादत है ये और तू फरिश्ता तो है
उल्फत नहीं, कुर्बत नहीं पर ज़हीन जज़्बात तो हैं
अधूरी हसरतों से भरे पर हसीं हालात तो हैं