Saturday, September 19, 2020

आईने से मुहब्बत

 

आईने से मुहब्बत इतनी न करो

ज़ालिमाना ये हरकत इतनी न करो

आईनों की तारीफें अच्छी हैं मगर

हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो 


हाँ वाजिब है तेरी ज़ुल्फ़ों का इतराना

बिना लव्ज़ों के पूरी ग़ज़ल कह जाना

शेर कुछ हम कहें इसका मौका भी तो दो 

खुद अपने से ही उल्फत इतनी न करो  

हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो 


सेल्फी में वो तबस्सुम केहर ढाती है

कभी कभी वो तस्वीर नज़र आती है 

हम आशिक़ तस्वीर से कर लेंगे गुज़ारा

तुम तस्वीरों में किल्लत इतनी न करो

हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो 


ज़ुल्मों को तेरे देख रही है खुदाई 

मिसाल बन रही है तेरी बेपरवाही 

नज़र में खुदा की ये हिमाकत होगी

इसलिए ये हिमाकत इतनी न करो 

हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो 


Friday, September 11, 2020

अनजानों का मजमा

अनजानों का मजमा
फासलों को भरता है
वाकिफ तो दूरियों का
अहसास दिलाते हैं

दूर जो मशाल 
जल रही है तेरी
देख उसे अंधेरों में
हम सुकून पाते हैं

वक़्त की सुरंग में
गुंजाइश नहीं है रुकने की
गुज़रते लम्हों के पाँव 
हमें कुचले जाते हैं

तुम खड़े रहना 
अपनी बाहें फैलाए
हम न सही हमारे ख़याल
वहीँ डेरा जमाते हैं

हमारी मुलाकातें

हमारी मुलाकातें होतीं हैं
शायद तुझे अहसास नहीं

ख़यालों में तुझे बुलाता हूँ
तेरी ज़ुल्फ़ों को सहलाता हूँ
दिन कैसे गुज़रा 
ये बताता हूँ
रोज़मर्रा की बातें हैं
ऐसी तो कोई ख़ास नहीं
हमारी मुलाकातें होतीं हैं
शायद तुझे अहसास नहीं

तेरे सपनों को सुनता हूँ
अपने भी थोड़े बुनता हूँ
यादों में जो चमक रहे
मैं उन लम्हों को चुनता हूँ
दूर से उनको देख के खुश हूँ
क्यूंकि अब वो मेरे पास नहीं
हमारी मुलाकातें होती हैं
शायद तुम्हें एहसास नहीं

कुछ खालीपन तो लगता है
एक मीठा दर्द सुलगता है
आशिकानापन 
तनहा शामों का ठगता है
कहने को तो सब ठीक है
कोई गम नहीं, मैं उदास नहीं
हमारी मुलाकातें होती है
शायद तुझे अहसास नहीं

इबादत की इजाज़त

इबादत की इजाज़त तू मुझे दे दे

तेरे जलवों की हसरत तू मुझे दे दे 

फिरता हूँ बेमकसद गलियों में तेरी

आशिक़ाना ये मकसद तू मुझे दे दे 


तू नज़दीक है, इस बात का मैं खैर करूँ 

और आशिक़ भी हैं, उन सब से मैं बैर करूँ  

लम्हा ही सही, दूर से कर लूँगा दीदार 

लम्हे में भरी मुद्दत तू मुझे दे दे 


पिरोए हैं ज़ुल्फ़ों में तेरे ख्वाब कई 

डुबो दिए तेरे नूर में आफताब कई  

वफ़ाएं और भी हैं निभाने के लिए

बेवफाई की तोहमत तू मुझे दे दे 


कहे तू के मैं खुद की हदों में रहूँ

बेसुद्ध या बेहाल मयकदों में रहूँ 

हो नशा तेरा, किसी शराब का न हो 

इसी सुरूर की ग़फ़लत तू मुझे दे दे 


यूँ तो चाहत की कीमत बहुत सस्ती है

तेरी आँखों की चमक ही में ये बस्ती है

तू इधर देख, चकाचौंध नज़ारा होगा

उस नज़र से मुहब्बत तू मुझे दे दे     


इबादत की इजाज़त तू मुझे दे दे

तेरे जलवों की हसरत तू मुझे दे दे 

फिरता हूँ बेमकसद गलियों में तेरी

आशिक़ाना ये मकसद तू मुझे दे दे 


Saturday, September 5, 2020

लहरों का बैर

  

लहरों का बैर कश्ती से नहीं

उलझती वो अपने ही पानी से हैं


माझी उन लहरों से जूझेगा ज़रूर 

पर रिश्ता तो उसका रवानी से है


हवाएं भी रुख बदलती रहेंगी

सरोकार अपनी तर्जुमानी से है 


साहिल कई हैं, ठिकाना कहाँ है?

फैसला ये मेरी मनमानी से है


मौसम बदलेंगे और बारिश भी होगी

ये तमाम रंग मेरी कहानी से हैं 


जल परियां भी होंगी सफर में कई 

मेरा इश्क़ तो बस एक दीवानी से है


लहरों का बैर कश्ती से नहीं

उलझती वो अपने ही पानी से हैं