पिंजरे में रात दिन फड़फड़ाती हैं क़ैद में ये कितना करहाती हैं! खोल दिया पिंजरा तो उड़ जाएँगी कहीं दर्द भरी यादें फिर सताएंगी नहीं तू पिंजरा खोलने से क्यों घबराती है?
दबे सुरों में ग़ज़ल गुनगुनाने लगा हूँ मैं ज़िन्दगी से कुछ लम्हे चुराने लगा हूँ मैं लापता है वो वक़्त ज़माने की नज़र में तेरे साथ में जो तन्हा बिताने लगा हूँ मैं
तोरण सजी दरवाजों पर चरक चढ़ी लिबाजों पर लड़ियों के घूंघट हर घर ने ओढ़े मिठाई ने रिश्ते पडोसी से जोड़े ताश के पत्ते जिताते हराते रिवाजों में कैसी हरकत ये पाते के ख़ुशी बेवजह शोर मचाती है गम के अँधेरे का गला घोट जाती है तुम्हे भी ख़ुशी का पूरा सा हक़ हो जादू दिवाली का मुबारक हो मुबारक हो मुबारक हो
ख्वाहिशों का बादल आसमान में उड़ता रहा ज़रूरतों के वज़न से मैं ज़मीन से जुड़ता रहा ऊंचाइयों की ललक में जो मैं बेबाक लपकता रहा वो बादल ख्वाहिशों का थोड़ा थोड़ा टपकता रहा ये कैसी बरसात थी के प्यास तो तरी नहीं ख्वाहिशों की ख्वाहिश में ज़िन्दगी की गागर भरी नहीं गागर, सागर, नदी , तालाब सब तो मेरे वश में थे पानी के हज़ारों रंग सब मेरे आँगन के कलश में थे एक दिन उतार लिया बादल को ये करिश्मा भी हो गया हाथ लगा सिर्फ धुंद घना और मेरे घर का रस्ता खो गया
वो गली से मेरी गुज़रती तो होगी यादें मेरी कुछ हरकत करती तो होगी वो खिड़की के परदे पे परछाईं मेरी देख कर ठंडी आहें वो भरती तो होगी वो गली से मेरी गुज़रती तो होगी
कोई शक़्स गर बगल से निकल जाये तो अंदाज़ में जिसके मेरी झलक आये तो नज़रें चुराकर वो पल्लू की आड़ से उसकी सूरत पे वो गौर करती तो होगी वो गली से मेरी गुज़रती तो होगी
उस नुक्कड़ पे जहां मिल ही जाता था मैं वो ही धुन जो कभी गुनगुनाता था मैं आज भी उन दीवारों से टकरा टकरा कर गूँज कर उसके दिल में उतरती तो होगी वो गली से मेरी गुज़रती तो होगी
कोई वाक़िफ़ यकायक ही भिड़ जाये जो सवाल ये पेचीदा सा छिड़ जाये जो पूछ ले वो यहां फिरने का असली सबब इस ख़याल से थोड़ा वो डरती तो होगी वो गली से मेरी गुज़रती तो होगी
वो पूछती नहीं और मैं भी कहता नहीं उस गली में मगर अब मैं रहता नहीं ढून्ढ ले जा पर गली में मेरी रूह को वो वहीँ तेरा इंतज़ार करती तो होगी वो गली से मेरी गुज़रती तो होगी
आज चकाचौंद है ये रात तेरी हर महफ़िल में होती है बात तेरी कहीं जश्न तो कहीं ज़र्रानवाज़ी भी है कहीं तारीफों की आतिशबाज़ी भी है जो सन्नाटा था कल तक वो आज नहीं पर तू इस शोहरत की मोहताज नहीं तेरा जज़्बा तो बरकत करता रहेगा तेरा हुनर तो हरकत करता रहेगा