बहुत कुछ कह जाती है ज़िन्दगी हमसे
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर
पेचीदा हैं ये रिश्तों के रस्म-ओ-रिवाज़
निभाओ तो ज़ंजीर है, निबटाओ तो डोर
इंतज़ार की रातों का अंत होगा ज़रूर
शुबहा से टूटें ख्वाब, उम्मीद रहे तो भोर
इज़हार-ए-मुहब्बत करें भी तो कैसे
कह दें तो जोरा जोरी, न कहें ...कमज़ोर
बहुत कुछ कह जाती है ज़िन्दगी हमसे
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर
पेचीदा हैं ये रिश्तों के रस्म-ओ-रिवाज़
निभाओ तो ज़ंजीर है, निबटाओ तो डोर
इंतज़ार की रातों का अंत होगा ज़रूर
शुबहा से टूटें ख्वाब, उम्मीद रहे तो भोर
इज़हार-ए-मुहब्बत करें भी तो कैसे
कह दें तो जोरा जोरी, न कहें ...कमज़ोर
बहुत कुछ कह जाती है ज़िन्दगी हमसे
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर