shayadshayar
Sunday, December 16, 2018
पिंजरा
पिंजरे में रात दिन फड़फड़ाती हैं
क़ैद में ये कितना करहाती हैं!
खोल दिया पिंजरा तो उड़ जाएँगी कहीं
दर्द भरी यादें फिर सताएंगी नहीं
तू पिंजरा खोलने से क्यों घबराती है?
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