Saturday, May 30, 2020

चिलमनों से बदलते रिश्ते

हुआ करता था मेरा चिलमनों से बैर 
तेरे जलवों पे उनका पहरा जो था 

अब दौर-ए-कोरोना है
एहतियातों की बारिश है
दूर से ही मिलना है
ये चिलमनों की साज़िश है

कर ली दोस्ती उन पर्दों से 
उन पर्दों पे तेरा चेहरा जो था

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