Wednesday, July 22, 2020

इंतेखाब

बहुत कुछ कह जाती है ज़िन्दगी हमसे 
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर 

पेचीदा हैं ये रिश्तों के रस्म-ओ-रिवाज़ 
निभाओ तो ज़ंजीर है, निबटाओ तो डोर 

इंतज़ार की रातों का अंत होगा ज़रूर 
शुबहा से टूटें ख्वाब, उम्मीद रहे तो भोर 

इज़हार-ए-मुहब्बत करें भी तो कैसे 
कह दें तो जोरा जोरी, न कहें ...कमज़ोर 

बहुत कुछ कह जाती है ज़िन्दगी हमसे 
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर 
    

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