Sunday, August 8, 2021

मुकम्मल रिश्ते


ये रूहानी ही सही पर दुरुस्त निस्बत तो है

मेरा मुस्तकबिल नहीं  तू  मेरी किस्मत तो है 


ये शायराना ही सही पर मेहफ़ूज़ नाता तो है

तू मेरी ग़ज़ल में नहीं पर ज़िक्र तेरा आता तो है 


ये जिस्मानी ना सही बिष कीमत रिश्ता तो है

हवस नहीं इबादत है ये और तू फरिश्ता तो है


उल्फत नहीं, कुर्बत नहीं पर ज़हीन जज़्बात तो हैं

अधूरी हसरतों से भरे पर हसीं हालात तो हैं


No comments:

Post a Comment