जिस नादान को दो वक़्त की रोटी नसीब न थी
वो खैरात में मिली फुलझड़ी का क्या करेगा?
सोचा तो यही था मैंने... पर उसकी मुस्कान देख कर
लगा की ख़ुशी तो बहाना ढूंढ़ती है दिल में घर करने का
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