ताश की आधी गड्डी हमने
फैंट फैंट के बाटी है
प्यार मुहब्बत शक़ और झगड़ा
सब झेल के काटी है
फैंट फैंट के बाटी है
प्यार मुहब्बत शक़ और झगड़ा
सब झेल के काटी है
चिड़ी के पत्ते कभी बटे
और कभी पान की बारी थी
गुससे में भी तू मुझको
लगती बहुत ही प्यारी थी
और कभी पान की बारी थी
गुससे में भी तू मुझको
लगती बहुत ही प्यारी थी
बेगम बादशाह साथ बटे
तो कभी हिससे आया गुलाम
ईंटों से बचने के लिए
हर हुकुम को मैंने किया सलाम!
तो कभी हिससे आया गुलाम
ईंटों से बचने के लिए
हर हुकुम को मैंने किया सलाम!
आधी गड्डी और पड़ी है
और दो जोकर भी तो हैं
माना के ज़ाया उम्र हुई पर
कुछ पाते खोकर भी तो हैं!!
और दो जोकर भी तो हैं
माना के ज़ाया उम्र हुई पर
कुछ पाते खोकर भी तो हैं!!
No comments:
Post a Comment