Wednesday, January 25, 2017

नए रिश्ते निभाने नहीं आते

नए रिश्ते निभाने नहीं आते
कुछ सपने भुलाने नहीं आते
पुरानी यादों की गुल्लक तोड़ कर देखी
अब वो सिक्के चलाने नहीं आते

कई मोड़ हमने मोड़ कर देखे
टूटे दिलों को फिर जोड़ कर देखे
ढूँढ़ते रहे बहाने नयी शुरुआतों के
भूलने के बहाने नहीं आते
नए रिश्ते निभाने नहीं आते

तू खफा है तो ये तेरा हक़ है
मैं मुल्ज़िम हूँ पर ये फ़रक़ है
दुनिया छिपा लेती है जज़्बात अपने
मुझे दर्द छिपाने नहीं आते
नए रिश्ते निभाने नहीं आते

रहम कर पकड़ ले हाथ मेरे
कुछ दूर तो चल ले साथ मेरे
कुछ लिख ही दूंगा उसको देख तुझ में
गैरों पे शेर सुनाने नहीं आते
नए रिश्ते निभाने नहीं आते


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