Wednesday, March 8, 2017

एक दिन की खैरात: Women's Day

बराबरी की जंग तू लड़ना मत
इस मायाजाल में तू पड़ना मत
तेरा वजूद आज़ाद है
कुछ भी कर गुजरने को
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत

तेरा दिन किसी का ग़ुलाम नहीं
तेरी ख्वाहिशें बिलकुल आम नहीं
तय कर तू क्या होगी पहचान तेरी
खुद ज़नाना अंदाज़ों को जकड़ना मत
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत

एक दिन की खैरात मत करना क़ुबूल
तेरी बुलंदी का रहे  बस एक उसूल
हर दिन है तेरा, हर रात भी तेरी
इस हक़ के आग़ाज़ से बिछड़ना मत
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत

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