Monday, March 13, 2017

होली मुबारक समृद्धि



भोली है निकली है घर से
होली है दुबकी नहीं डर से
दरिंदा है छेड़ेगा खामखां में
परिंदा है वो दिल आसमाँ में
डरेगी नहीं वो गलत ताकतों से
मरेगी नहीं उसकी चाह आफतों से
ख़ौफ़ज़दा हूँ खतरों का ज़िक्र तो करूंगा
एक पिता हूँ हर लम्हा फ़िक्र तो करूंगा
टोकूंगा नहीं सबक़ है इस किस्से में
रोकूंगा नहीं रंग सभी हैँ तेरे हिस्से में

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