महफ़िल में हर शख्स लाया
कुछ यादों के चिराग
चौंधिया गयीं आँखें
जब मिलके जली वो आग
पिघल गए इस आग में
वो उम्र के नकाब
नशा बोतलों में नहीं
हंसी की थी शराब
ज़िन्दगी के तजुर्बे थे
कुछ मीठे कुछ खट्टे थे
कुछ आगे कुछ पीछे पर सब
एक थाली के चट्टे बट्टे थे
मेरी नज़र से देखो तो
हसीनाएं सब हसीन थीं
चेहरे पे झुर्रियां थीं मगर
बहुत बहुत महीन थीं
सच पूछो जष्न मनाने के
इरादे रात भर के थे
महफ़िल बिखरी सौ बहानों से
तकाज़े असल उमर के थे !
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