चलो जवानी से पीछा छूटा
अब काम के काम हो जाएं
नोन तेल लकड़ी के आगे
कुछ नए मकाम हो जाएं
फिकरों के हिसाब लगाकर
जोड़, घटा और भाग गुना कर
वसीहतों पे नाम चढ़ाकर
हम खुद अपने नाम हो जाएं
अब काम के काम हो जाएं
जलवों के अरमानों से हटकर
हुस्न के रेशम जाल झटक कर
रिश्तों की गहराई समझकर
गहराई का अंजाम हो जाएं
अब काम के काम हो जाएं
दुनियादारी से न तोल कर
शौकों की गुल्लकें खोल कर
बस शौकीनों का ही मोल कर
उनमें ही नीलाम हो जाएं
अब काम के काम हो जाएं
एक और हकीकत है, जानकर
मायाजाल को हैरान कर
रूहानी सच्चाई मानकर
उस सच में ही तमाम हो जाएं
चलो जवानी से पीछा छूटाें
अब काम के काम हो जाएं
नोन तेल लकड़ी के आगे
कुछ नए मकाम हो जाएं
No comments:
Post a Comment