हसीनों से दिल तो लगाना पड़ेगा
शायर हूँ, ये जोखिम उठाना पड़ेगा
इश्क़ का इत्तर लव्ज़ों में तोलकर
काफियों में खयालात बोलकर
हालात-ए-जिगर तो सुनाना पड़ेगा
शायर हूँ, ये जोखिम उठाना पड़ेगा
मुखड़े की रौनक मुखड़े में डाल
अंतरे में लिखूं मैं दिल का हाल
नज़ाकत से उनको लुभाना पड़ेगा
शायर हूँ, ये जोखिम उठाना पड़ेगा
मुद्दे तो हैं चुनने को मगर
श्रोता तो हों सुनने को इधर!
रोज़गार मुझे भी कमाना पड़ेगा
शायर हूँ, ये जोखिम उठाना पड़ेगा
हसीनों से दिल तो लगाना पड़ेगा
शायर हूँ, ये जोखिम उठाना पड़ेगा
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