Saturday, September 19, 2020

आईने से मुहब्बत

 

आईने से मुहब्बत इतनी न करो

ज़ालिमाना ये हरकत इतनी न करो

आईनों की तारीफें अच्छी हैं मगर

हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो 


हाँ वाजिब है तेरी ज़ुल्फ़ों का इतराना

बिना लव्ज़ों के पूरी ग़ज़ल कह जाना

शेर कुछ हम कहें इसका मौका भी तो दो 

खुद अपने से ही उल्फत इतनी न करो  

हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो 


सेल्फी में वो तबस्सुम केहर ढाती है

कभी कभी वो तस्वीर नज़र आती है 

हम आशिक़ तस्वीर से कर लेंगे गुज़ारा

तुम तस्वीरों में किल्लत इतनी न करो

हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो 


ज़ुल्मों को तेरे देख रही है खुदाई 

मिसाल बन रही है तेरी बेपरवाही 

नज़र में खुदा की ये हिमाकत होगी

इसलिए ये हिमाकत इतनी न करो 

हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो 


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