आईने से मुहब्बत इतनी न करो
ज़ालिमाना ये हरकत इतनी न करो
आईनों की तारीफें अच्छी हैं मगर
हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो
हाँ वाजिब है तेरी ज़ुल्फ़ों का इतराना
बिना लव्ज़ों के पूरी ग़ज़ल कह जाना
शेर कुछ हम कहें इसका मौका भी तो दो
खुद अपने से ही उल्फत इतनी न करो
हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो
सेल्फी में वो तबस्सुम केहर ढाती है
कभी कभी वो तस्वीर नज़र आती है
हम आशिक़ तस्वीर से कर लेंगे गुज़ारा
तुम तस्वीरों में किल्लत इतनी न करो
हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो
ज़ुल्मों को तेरे देख रही है खुदाई
मिसाल बन रही है तेरी बेपरवाही
नज़र में खुदा की ये हिमाकत होगी
इसलिए ये हिमाकत इतनी न करो
हम शायरों की ज़िल्लत इतनी न करो
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