दीवारों का हक़ अदा कर दो
खोलो खिड़की, दरवाज़ा बड़ा कर दो
प्यार होगा दायरों से
तो रुक जायेंगे लोग
ख़ाक होगा गर पहरा कड़ा कर दो?
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