Thursday, June 3, 2021

छोटी सी खिड़की

 एक छोटी सी खिड़की से

क्या क्या बसर हुआ 

लगता हवा का झोंका था

तूफां सा असर हुआ 


चाँद मासूम लगता था

चंचल तो चांदनी थी

थिरकती रही नज़रों में

पलकों में बांधनी थी


वो नोंक झोंक की चिलमन

जो सरकाई धीरे धीरे

एक हसीन शख्सियत 

नज़र आयी धीरे धीरे


ये खिड़की खुली है

और खुली ही रहेगी

उम्मीद उन अदाओं से 

चुलबुली ही रहेगी


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