Tuesday, October 3, 2023

वक़्त से बातचीत waqt se baatcheet


ये पूछता है मुझसे

अब वक़्त का तक़ाज़ा 

यहां तक तू पहुंचा 

अगला मुकाम क्या है


            ऐ वक़्त तू है ज़ालिम

            है  इस तरह नवाज़ा

            ऐंठे हैं दाम अब तक

            तो अगला दाम क्या है?


काम मेरा मैं खोलूं 

फिर नया दरवाज़ा 

तू बढ़ के खोल उसको

तेरा और काम क्या है?


            उम्मीद है ये बासी

            तू पेश कर कुछ ताज़ा

            ये ज़िन्द्दगी है बाकी

            तेरा इंतज़ाम क्या है?


वो इंतज़ाम मेरा

तो है एक जनाज़ा 

तेरी जंग तय करेगी

तेरा अंजाम क्या है 


            रिश्तों की दास्तान है    

            ज़िन्दगी लिहाज़ा

            रिश्तों में ढूंढ़ता हूँ 

            मेरा अहतराम क्या है 


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