अंधेरों से बाहर आना अच्छा लगता है
इन आँखों का चौंधियाना अच्छा लगता है
नई नस्ल के नए तरीके हम भी सीखेंगे
अपनी हिकमत को चमकाना अच्छा लगता है
शिकनों के घावों को हम तनहा सेह लेंगे
महफिलों में मुस्कुराना अच्छा लगता है
हम दौड़ लिए दुनियादारी की रफ्तारों से
अब इन लम्हों को टहलाना अच्छा लगता है
दूर चले जाते हैं जिनको जाना होता है
तेरा जाके वापस आना अच्छा लगता है
दिल न मांगे इतना सब कुछ तेरी निस्बत से
महज़ नज़र का एक नज़राना अच्छा लगता है
साथ तेरे चलते चलते जब पीछे रह जाऊं
तेरा थोड़ा सा घबराना अच्छा लगता है
मुरीद हुई आखिर मेरी तू इतनी शिद्दत बाद
अब तुझे थोड़ा तरसाना अच्छा लगता है
सच्चाई जैसी हो अपनी वैसी जी लेंगे
पर हम दोनों का अफसाना अच्छा लगता है
मेरे शेरों को ये दुनिया चाहे न चाहे
तेरा उनको गुनगुनाना अच्छा लगता है
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