Saturday, September 21, 2024

मैं भटक गया था main bhatak gaya tha

 मेरे सामने थी मंज़िल 

पर मैं भटक गया था 

सब कुछ था मुझको हासिल  

पर मैं भटक गया था 


करी इश्क़ की वकालत 

जीती हुई थी बाज़ी 

मेरा दिल था मुव्वक्किल 

पर मैं भटक गया था 


वो कारवाँ था जिसमें 

हर ख्वाब था मयस्सर 

थी तू भी उसमें शामिल

पर मैं भटक गया था 


तूफ़ान से बचाके

मैं कश्ती लेके आया

वो सामने था साहिल

पर मैं भटक गया था


शेरों को मेरे सुनने 

बेसब्र था ज़माना

पूरी सजी थी महफ़िल

पर मैं भटक गया था


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