Sunday, August 10, 2025

वो बहुत दूर चला गया vo bahut door chala gaya

बढ़ गए हैं फासले कशिश बुलंद रही

तेरी बेरुखी भी हमको पसंद रही 


बस इस उम्मीद पर ही के तू खाब में दिखे

रत जगे किये थे पर आँखें बंद रहीं 


बेशुमार हैं सितम तूने जो थे किये 

हसीं लम्हों की याद मेरे पास चंद रहीं 


शर्तें वो प्यार की मंज़ूर न थी तुझको

चाहत मेरी हर शर्त से रज़ामंद रही 


सुलग रहा था मैं जब उल्फत की आग में 

तेरी तरफ से लौ थोड़ी मंद मंद रही 

No comments:

Post a Comment