इन्तेज़ामात सारे युहीं रह गए
मंसूबे हमारे युहीं रह गए
कितनी शिद्दत से जोड़ी थीं रानायियाँ
सब ख़ुशी के गुब्बारे युहीं रह गए
कितने अय्याश महफ़िल में तेरी गए
हम मुहब्बत के मारे युहीं रह गए
जब बुलावा वो ऊंची इमारत का था
ये गली और चौबारे युहीं रह गए
झूठ और फरेबों को आसरा मिला
हम सच्चे बेचारे युहीं रह गए
वो फलक के सितारों को शोहरत मिली
ज़मीन के सितारे युहीं रह गए
जब सियासत ने की थीं ज़बर्दस्तियाँ
खोखले सब वो नारे युहीं रह गए
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