Sunday, May 24, 2026

युहीं रह गए yuhin reh gaye

 इन्तेज़ामात सारे युहीं रह गए

मंसूबे हमारे युहीं रह गए

कितनी शिद्दत से जोड़ी थीं रानायियाँ 

सब ख़ुशी के गुब्बारे युहीं रह गए 

कितने अय्याश महफ़िल में तेरी गए 

हम मुहब्बत के मारे युहीं रह गए

जब बुलावा वो ऊंची इमारत का था

ये गली और चौबारे युहीं रह गए

झूठ और फरेबों को आसरा मिला 

हम सच्चे बेचारे युहीं रह गए

वो फलक के सितारों को शोहरत मिली

ज़मीन के सितारे युहीं रह गए

जब सियासत ने की थीं ज़बर्दस्तियाँ 

खोखले सब वो नारे युहीं रह गए


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