किसी रेगिस्तान पे रेंगती हुई
चली आती हैं गर्म हवाएं
सर पटकती हैं मेरे एयर कंडिशन्ड
कमरों की खिड़कियों पर
नाचती हैं धूल के संग
खाली मैदानों पे
एक ज़माना था खस की टाटों पे
प्यास बुझा लेती थी अपनी
दरख्तों की हरियाली में सुस्ता कर
कर लेतीं थी अपना गुस्सा ठंडा
अब ये गुस्सा मुझ पर बरसता है
कुदरत से बैर कर मैं
कुछ कमज़ोर हो गया हूँ
और वो आज हो गयीं मुझपे हावी.
चली आती हैं गर्म हवाएं
सर पटकती हैं मेरे एयर कंडिशन्ड
कमरों की खिड़कियों पर
नाचती हैं धूल के संग
खाली मैदानों पे
एक ज़माना था खस की टाटों पे
प्यास बुझा लेती थी अपनी
दरख्तों की हरियाली में सुस्ता कर
कर लेतीं थी अपना गुस्सा ठंडा
अब ये गुस्सा मुझ पर बरसता है
कुदरत से बैर कर मैं
कुछ कमज़ोर हो गया हूँ
और वो आज हो गयीं मुझपे हावी.
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