बादल
बादलों ने कहाँ मंज़िलें तलाशी हैं
सफर में फना होना फितरत है इनकी
हवा
हवा तो मनचली है, यकायक रुख बदलती है
एक हम ही हैं जो रास्तों के मोहताज हैं
एक हम ही हैं जो रास्तों के मोहताज हैं
ओस और धूप
ओस और धूप का मन मुटाव मिटाना नहीं आता
चाहते तो हम भी हैं कौस-ओ-कज़ाह का जलवा
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