मंदिर
अंतर्मन के मंदिर को
भौतिकता से जोड़ दिया
और बर्बरता के खँडहर को
बर्बरता से तोड़ दिया
एक विशाल जनमानस को
निद्रा से झकझोर दिया
अति नम्र मानवता को
नाश के मुख से मोड़ दिया
इतिहास के भावी पन्नो से
हास्य रस निचोड़ दिया
झूट के साहूकारों के
कथनों ने कफ़न ओढ़ लिया
अन्धकार की सदियों को
एक नया उदय और भोर दिया
कड़वे कोलाहल से कोमल
शंकों का पावन शोर दिया
बहुरंगी इस धरती पर
केसर को थोड़ा ज़ोर दिया
और कच्चे रंग सा जो बहता था
उस केसर ने बहना छोड़ दिया
अंतर्मन के मंदिर को
भौतिकता से जोड़ दिया
और बर्बरता के खँडहर को
बर्बरता से तोड़ दिया
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