Tuesday, April 6, 2021

मुलाक़ात

 देर सवेर मुलाक़ात तो होगी

तकल्लुफ से ही पर बात तो होगी

सबर भी है, उम्मीद भी है

फिर से सही, शुरुआत तो होगी

इश्क़ का ज़ोर जब असर कर दे

दुनिया इधर से उधर कर दे 

आज़मा के देखूं इश्क़ का ज़ोर 

कभी ये करामात तो होगी

तेरी बेरुखी खंजर सी है

ये रूह तेरे बिन बंजर सी है 

दीदार-ए-यार के प्यासे हैं हम

बेमौसम ही, बरसात तो होगी

ख्वाब और हकीकत के दरमियाँ

फासले तये करती कहानियां 

गुज़रती है सिर्फ ख़्वाबों में जो 

हकीकत में ववारदात तो होगी

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