Monday, April 12, 2021

वक़्त

वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है 

तारीख से इस ने हर शख्स मिटाया है 


इमारतों को खँडहर करार इसने किया है 

और यह गुनाह बार बार इसने किया है 

कहते हैं की वक़्त हर ज़ख्म भर देता है 

इस वहम को भी तार तार इसने किया है 

तेरी जुदाई ने हमें बरसों सताया है 

वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है?


ज़माने में इज़ाफ़ा ये वक़्त क्या करेगा?

जवानी का लिफाफा ये वक़्त क्या भरेगा?

लड़कपन गवा दिया इश्क़ के जूए में 

उस दाव पे मुनाफा ये वक़्त क्या करेगा?

सिलसिला उम्मीदों का इसने चलाया है? 

वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है


वक़्त सिर्फ इस लम्हे का मेहमान है

सपनों की बेसब्री से अनजान है?

एक तू है जिसे वक़्त ने फुर्सत से बनाया  

बता वक़्त तुझपे क्यों मेहरबान है?

हर बरस तेरे नूर में निखार आया है!

वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है?


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