वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है
तारीख से इस ने हर शख्स मिटाया है
इमारतों को खँडहर करार इसने किया है
और यह गुनाह बार बार इसने किया है
कहते हैं की वक़्त हर ज़ख्म भर देता है
इस वहम को भी तार तार इसने किया है
तेरी जुदाई ने हमें बरसों सताया है
वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है?
ज़माने में इज़ाफ़ा ये वक़्त क्या करेगा?
जवानी का लिफाफा ये वक़्त क्या भरेगा?
लड़कपन गवा दिया इश्क़ के जूए में
उस दाव पे मुनाफा ये वक़्त क्या करेगा?
सिलसिला उम्मीदों का इसने चलाया है?
वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है
वक़्त सिर्फ इस लम्हे का मेहमान है
सपनों की बेसब्री से अनजान है?
एक तू है जिसे वक़्त ने फुर्सत से बनाया
बता वक़्त तुझपे क्यों मेहरबान है?
हर बरस तेरे नूर में निखार आया है!
वक़्त ने बर्बादी का बीड़ा उठाया है?
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