भावनाओं की अभीव्यक्ति
आव्यशक प्रतीत होती है
कोई अति-विशेष व्यक्ति
आव्यशक प्रतीत होती है
हमने उपेक्षा अनुसार
निडर हो, कर दिया उच्चार
अब आपकी ओर से आसक्ति
आव्यशक प्रतीत होती है
क्षमता आलिंगन में नहीं
आपके मधुर कथन में है
अधरों से निकली वो शक्ति
आव्यशक प्रतीत होती है
भेद भाव विचारों में होंगे
इन भेद भावों का स्वागत है
ये वार्तालापों की युक्ति
आव्यशक प्रतीत होती है
ये संबंधों में संदेहमयी
आलोचनाएं भी आएँगी
मन में इस विचरण से मुक्ति
आव्यशक प्रतीत होती है
मेरे अंतर्मन का दृश्य
सम्पूर्णता की मूरत तुम हो
सम्पूर्णता की ऐसी भक्ति
आव्यशक प्रतीत होती है
No comments:
Post a Comment