Sunday, June 20, 2021

यकीन है मुझको के चाहती हो तुम मुझे

यकीन है मुझको के चाहती हो तुम मुझे 

ख़्वाबों में अपने रोज़ बुलाती हो तुम मुझे 

के घूमता रहता हूँ ख्यालों में रात दिन 

घुमा घुमा के रोज़ थकाती हो तुम मुझे 

यकीन है मुझको के चाहती हो तुम मुझे 


अरमान तुम्हारे भी मुकम्मल ज़रूर हों

शिकवे गिले जो हैं एक इशारे से दूर हों

शिद्दत से जो करती हो वो सुनते हैं दुआ हम 

दुआओं की बंदिश में बंधाती हो तुम मुझे 

यकीन है मुझको के चाहती हो तुम मुझे 

 

संजीदगी से ज़िन्दगी को देख लो मगर

सफर तो सिर्फ एक है, पर लाख हैं डगर 

हंसी ख़ुशी चलती रहो पर याद ये रखो 

हंसाता तुम्हें मैं हूँ, हंसाती हो तुम मुझे

यकीन है मुझको के चाहती हो तुम मुझे 


कितना भी धकेलो मुझे तुम फ्रेंड ज़ोन में 

तस्वीर मेरी छिपी तुम्हारे भी फ़ोन में

अपनी अदाओं से और अपने ही लहज़े से 

फेसबुक के ज़रिये रिझाती हो तुम मुझे

यकीन है मुझको के चाहती हो तुम मुझे  


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