तू फासले बनाये रख
ये हक़ है तुझे
उल्फतें दबाये रख
ये हक़ है तुझे
ये दिल ही के जज़्बात हैं
जो ज़्याती मामलात हैं
तू हमें पराए रख
ये हक़ है तुझे
तेरे बहुत अज़ीज़ हैं
अदाओं के मरीज़ हैं
ये रोग तू फैलाये रख
ये हक़ है तुझे
जो तेरे दीवानें हैं
फितरत से परवाने हैं
तू शम्मा जलाये रख
ये हक़ है तुझे
उस नज़र में बयान है
तेरी चाह का सामान है
तू नज़रें झुकाये रख
ये हक़ है तुझे
बेशक हमें बदनाम कर
बेइज़्ज़त सर-ए-आम कर
खुद दामन बचाये रख
ये हक़ है तुझे
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