ललक लड़कपन की लाये
हलचल ह्रदय की हर्षाये
वर्षों विलम्बित और वंचित
संयोगता से सुसंचित
मधुर मिलन मंशानुसार
सुदृढ़ हुआ ये साक्षात्कार
तृष्णा तेरी, मेरा तर्पण
दृष्टि तेरी, मेरा दर्पण
अर्चन तेरी, मेरा अर्पण
मीठा मनोभावित मिश्रण
सरल संभावों का स्पंदन
है आलोकिक ये आलिंगन
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