Wednesday, January 12, 2022

आलिंगन

 ललक लड़कपन की लाये

हलचल ह्रदय की हर्षाये

वर्षों विलम्बित और वंचित

संयोगता से सुसंचित

मधुर मिलन मंशानुसार 

सुदृढ़ हुआ ये साक्षात्कार    


तृष्णा तेरी, मेरा तर्पण

दृष्टि तेरी, मेरा दर्पण 

अर्चन तेरी, मेरा अर्पण 

मीठा मनोभावित मिश्रण 

सरल संभावों का स्पंदन

है आलोकिक ये आलिंगन 


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