गिन्नियों की खनक में
महफिलों की चमक में
कामयाबी की हदों में
झिलमिल शोहरतों में
ढूंढी बहुत पर नहीं मिली
तुतलाती ज़ुबानों में
तकिये सिरहानों में
दादी के मर्तबानों में
मिलने के बहानों में
यारों के ठिकानों में
दिल-फैंक अफसानों में
ख़ुशी बिखरी पड़ी मिली
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