Sunday, December 1, 2024

मेरी इल्मी शहज़ादी meri ilmi shehzaadi

किस मुँह से मैं इज़हार करूँ

किस हक़ से तुझको प्यार करूँ 

मैं मुफ़लिस हूँ, तू रानी है

ये दर्जे कैसे पार करूँ

किस हक़ से तुझको प्यार करूँ 


तू तो इल्मी शहज़ादी है

दानिश्वरियों  की आदि है 

मैं ठहरा इतना अल्हड़ 

तुझसे बातें क्या चार करूँ 

किस हक़ से तुझको प्यार करूँ 


तेरे लहज़े से ज़ाहिर है

तू नफ़ासतों में माहिर है

होड़ है तेरी महफ़िल में

कितना मैं इंतज़ार करूँ

किस हक़ से तुझको प्यार करूँ 


मैं आशिक़ हूँ के कायर हूँ

एक दो कौड़ी का शायर हूँ

लव्ज़ों के पुल ही बांधूंगा

कैसे उनको साकार करूँ

किस हक़ से तुझको प्यार करूँ


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